मणिपुर- नीली पहाड़ियों के बीच 'ज्वेल ऑफ इंडिया'

 मणिपुर- नीली पहाड़ियों के बीच 'ज्वेल ऑफ इंडिया'

 

ब्रिटिश काल की प्रसिद्ध लेखिका सेंट क्लेयर ग्रिमवुड ने लिखा था, "मणिपुर दुनिया की कई सुंदर जगहों से भी ज्यादा खूबसूरत है"। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मणिपुर को "ज्वेल ऑफ इंडिया" कहा था। वास्तव में नीली पहाड़ियों से घिरे हुए इस राज्य की कला, संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और यहां के लोगों को देख आप भी यही कहेंगे। मणिपुर की बात आज हम इसलिये कर रहे हैं, क्योंकि आज ही के दिन इसे राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ था।

 

प्राचीन काल में मणिपुर का स्वर्णिम इतिहास रहा है। ब्रिटिश काल में 1891 में एंग्लो-मणिपुरी युद्ध के बाद इसे प्रिंसली स्टेट घोषित कर दिया गया था। 1947 में आजादी के बाद प्रिंसली स्टेट ऑफ मणिपुर भारत गणराज्य का हिस्सा बन गया। 15 अक्टूबर 1949 को यह केंद्र शासित प्रदेश बना और 21 जनवरी 1072 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ। तब से लेकर अब तक मणिपुर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। मणिपुर की ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानी जीएसडीपी  231.67 बिलियन के पार हो गई है।

 

मणिपुर से जुड़े रोचक तथ्‍य

 

> मणिपुर का कुल क्षेत्रफल 22,327 वर्ग किलोमीटर है।

> मणिपुर में मेइतेई, नागा, कुकी, मेइतेई पंगल, समुदाय के लोग रहते हैं।

> पोलो खेल की शुरुआत मणिपुर से ही हुई थी। यह यहां का प्रादेशिक खेल है।  

> यहां कुल 60 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें 20 सीटें अनुसूचित जनजाति और एक सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।

> यहां 2 लोकसभा सीटें हैं और एक राज्यसभा की।

> 2011 में सेंसस के दौरान यहां की जनसंख्‍या 27,21,756 थी।

> यहां की राजभाषा मणिपुरी है।

> राज पक्षी नोंगयीन है और राज पशु संगई। राज पुष्‍प सिरोई लिली है।  

> मणिपुर में पुरुष शैक्षिक दर 86.5% है और महिला शैक्षिक दर 73.2%।

> यहां 33 जनजातियां निवास करती हैं।

> मणिपुरी नृत्यों में रास लीला, नुपा पाला, पुंग चोलोम, माइबी नृत्य, खंबा थेइबी नृत्य शामिल हैं।

> संगोल कांगजेई (मणिपुरी पोलो), युबी लकपी (मणिपुरी रगबी), हियांग तन्‍नाबा (बोट रेस), मुकना (मणिपुरी कुश्‍ती), कांग और थांग-ता व सरित सरत (मणिपुरी मर्शल आर्ट) यहां के लोकप्रिय खेल हैं।

 

मणिपुर के त्योहार

 

मणिपुर को त्योहारों की भूमि कहा जाता है। साल भर में कभी भी आप मणिपुर चले जाइये, एक न एक त्योहार की झलक आपको जरूर देखने को मिलेगी।

 

लई-हारओबा

 

यह त्योहार मई के महीने में मनाया जाता है, जिसमें वन देवता उमंग लई और पूर्वजों की पूजा की जाती है। इस मौके पर पुरुष और महिलाएं लोक नृत्य करती हैं। इस पर्व पर होने वाले समारोह में भारी संख्या में लोग शिरकत करते हैं।  

 

याओशांग (ढोल जात्रा)  

 

फरवरी-मार्च में फागुन के महीने में पूर्णिमा के दिन याओशांग त्योहार मनाया जाता है। इसे ढोल जात्रा भी कहते हैं। यह मणिपुर का प्रमुख त्योहार है। इस मौके पर मणिपुरी लोक नृत्य 'थाबल चोंगबा' देखने को मिलता है। इस मौके पर खेलों का आयोजन भी होता है।  

 

रथ जात्रा  


मणिपुर के प्रमुख त्योहारों में से एक रथ जात्रा पर भगवान जगन्नाथ की यात्रा निकाली जाती है। इस मौके पर भारी संख्‍या में श्रद्धालु आते हैं और कांग यानी रथ को खींचते हैं।  

 

रमज़ान (ईद)


मणिपुर में मुस्लिम त्योहार ईद को बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है। रमज़ान के महीने में एक से बढ़कर एक पकवानों से बाज़ार सज जाते हैं।  

 

 कुट (कुकी-चिन-मिज़ो का त्योहार)


कुकी-चिन-मिज़ो जनजाति के लोगों का यह त्योहार पतझड़ के दौरान मनाया जाता है। यहां के अलग-अलग जनजाति समुदाय के लोग इस त्योहार को अलग-अलग नाम से पुकारते हैं, जैसे चवांग-कुट या खोडोऊ, आदि। यह त्योहार हर साल 1 नवंबर को मनाया जाता है।  

 

गंग-गई (काबुई नागा जनजाति का त्योहार)


दिसंबर-जनवरी में वाकचिंग के महीने में यह त्योहार मनाया जाता है। गंग-गई पर लोक संगीत एवं नृत्य का आयोजन किया जाता है।  

 

चुम्पा (तांगखुल नागा जनजाति का त्योहार)


दिसंबर महीने में सात दिन चलने वाला यह त्योहार तांगखुल नागा जनजाति का प्रमुख त्योहार है। इस मौके पर गांवों में यात्राएं निकाली जाती हैं।

 

क्रिसमस


मणिपुर में क्रिसमस पर्व दो दिन मनाया जाता है- 24 और 25 दिसंबर को। पूरे मणिपुर में इस दौरान उत्सव का माहौल होता है। यह उत्सव नये साल यानी 1 जनवरी तक जारी रहता है।  

 

चेइराओबा (मणिपुर का नया साल)


अप्रैल में मनाये जाने वाले इस त्योहार पर लोग तरह-तरह के पकवान बनाते हैं। पहले देवता को चढ़ावा चढ़ता है उसके बाद कई प्रकार की रस्में होती हैं। इस त्योहार को मणिपुर के मुस्लिम भी मनाते हैं।  

   

हेईक्रू हिंडोंगबा


सितंबर महीने में यह त्योहार मनाया जाता है, जिसमें 16 मीटर लंबी नौकाओं के बीच रेस का आयोजन किया जाता है।


निंनगोल चाकोउबा


यह एक सामाजिक पर्व है। इस मौके पर वो शादीशुदा महिलाएं अपने मायके आती हैं, जिनकी शादी कहीं दूर होती है। यह त्योहार नवंबर में मनाया जाता है। अब मणिपुरी मुस्लिम भी इस पर्व को मनाने लगे हैं।  

 

लुई गई नी


फरवरी की 15 तारीख को हर साल यह त्योहार मनाया जाता है, जिसमें लोक नृत्यों का आयोजन किया जाता है। यह नागा समुदाय का त्योहार है, जो नागा एकता को मजबूत करने के उद्देश्‍य से मनाया जाता है।  

 

क्वाक जात्रा


यह त्योहार अक्तूबर में मनाया जाता है। इस मौके पर दुर्गा माता की पूजा की जाती है।

 

मणिपुर की अर्थव्यवस्था से जुड़े कुछ तथ्‍य

 

> मणिपुर सबसे तेजी से विकास की ओर आगे बढ़ रहे पूर्वोत्तर राज्यों में से एक है। यहां की स्‍टेट जीडीपी 231.67 बिलियन के पार हो गई है।


> 2014-15 में यहां के कपड़ों का निर्यात 0.19 मिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो 2018-19 में बढ़ कर 2.65 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।


> जुलाई 2019 की रिपोर्ट के अनुसार मणिपुर में स्‍थापित ऊर्जा संयंत्रों की कुल क्षमता 259.15 मेगावॉट है। जबकि राज्य में जलविद्युत परियोजनाओं से 2,200 मेगा वॉट बिजली पैदा की जा सकती है।  


> भारत सरकार यहां पर रेलवे लाइन बिछाने का काम कर रही है, जो 2020 तक पूरा हो जाएगा। जिसके पूरा होते ही जिरिबम, तुपुल और इम्फाल के बीच ट्रेनें चलने लगेंगी।  


> अगस्त 2019 में भारत सरकार ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके अंतर्गत स्‍पेस टेक्नोलॉजी की मदद से ग्रेटर इंफाल एरिया विकसित किया जाएगा।  


> फरवरी 2018 में एसोचैम, एमओएफबीआई, आईकार और नाबार्ड ने मणिपुर में स्टार्टअप को फूड प्रोसेसिंग से जोड़ने पर एक कॉन्‍फ्रेंस का आयोजन कया था।  


> तामेंगलोंग, चुराचंदपुर और इम्फाल में बैम्‍बू प्रोसेसिंह सेंटर स्‍थापित किए गए हैं। जल्‍द ही कदमतला, जिरिबम में बैम्बू टेक्नोलॉजी पार्क स्‍थापित किया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत 104.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर होगी।


> मणिपुर, भारत का पहला ऐसा राज्य है, जिसने नेशनल ई-गवर्नेंस प्लान के तहत 4 करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया है, जिसमें कॉमन सर्विस सेंटर, स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क, स्‍टेट डाटा सेंटर एंड स्टेट पोर्टल, स्‍टेट सर्विस डिलीवरी गेटवे और ई-फॉर्म शामिल हैं।


> रॉ सिल्क के उत्पादन में मणिपुर बहुत आगे है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में दिसंबर 2018 तक यहां 335 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ।  

   

> मणिपुर राज्य का 70 फीसदी क्षेत्र वन क्षेत्र में आता है। वन उत्पाद जैसे टिम्बर, फायरवुड, बैम्बू, आदि यहां के प्रमुख उत्पाद हैं। यहां फिग, ऑलिव और मैंडरिन का उत्पादन अच्‍छी तादाद में होता है।


> मणिपुर में पैदा होने वाले अनाज में 80 प्रतिशत धान होता है। सब्जियों और फलों की पैदावार के क्षेत्र में यह राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। सिल्क उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये भारत सरकार ने जापान सरकार के साथ मिलकर उद्योग को तेज़ी से आगे बढ़ाया। कुल मिलाकर मणिपुर भारत की अर्थव्यवस्‍था को मजबूती प्रदान करने में अहम भूमिका निभाने वाला है।

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